Mount Everest Tavel Cost
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The First Woman to Climb Mount Everest in India

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Mount Everest  –  [Click Here]

Mount Everest Tavel Costएवरेस्ट की चोटी के करीब पहुंचने के साथ खतरा बढ़ता जाता है 8000 मीटर की ऊंचाई पर सर्द हवाएं ऑक्सीजन का लगातार गिरना अस्तर जान ले सकता है इसी वजह से इसे डेथ जोन कहा जाता है बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के साउथ समिट 8749 मीटर पर पहुंच चुकी थी एवरेस्ट की चोटी मात्र 100 मीटर दूर रह गई थी। दल में चल रहे बाकी सभी लोग ने ऑक्सीजन मास्क पहन रखे थे अचानक मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया रास्ता दिखना बंद हो गया|

इतने करीब से चोटी तक ना पहुंचने का दुख शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है लेकिन प्रकृति के आगे हम सब बौने पड़ जाते हैं आप कितनी भी तैयारियां कर ले एवरेस्ट पर सारी प्लानिंग धरी की धरी रह जाती है मैं 37 साल की अस्मिता दोरजी इस विश्वास के साथ वापस लौट आए की अगली बार फिर कोशिश करूंगी।

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Mount Everest  बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के माउंट एवरेस्ट जैसे पहाड़ पर चढ़ाई करना मतलब मौत के मुंह में जाना। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि खुद को चुनौती दूंगी इससे पहले भारत से दो तीन महिलाएं इन ऑक्सीजन सपोर्ट के माउंट एवरेस्ट पर फतह की कोशिश कर चुकी है लेकिन साउथ सम्मिट तक पहुंचने वाली मैं पहली महिला हूं। एवरेस्ट सम्मिट की यह मेरी पहली कोशिश थी इससे पहले लद्दाख में यूपी कांगड़ी श्रमिक 20000 फुट बिना ऑक्सीजन के पूरी की थी तब आत्मविश्वास आया कि माउंट एवरेस्ट की कोशिश कर सकती हूं । मैं जमशेदपुर के टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन में इंस्ट्रक्टर हूं।

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Mount Everest – एवरेस्ट चढ़ाई में ऊंचाई की सारी ट्रैकिंग जीपीएस के जरिए होती है साथ में चलने वाले शिल्पा और गाइड भी ऊंचाई का हिसाब किताब रखते हैं एवरेस्ट से लौटने के बाद लोगों ने मुझसे पूछा कि बिना ऑक्सीजन के पहाड़ चढ़ने में क्या अंतर है मैं बताती हूं कि ऑक्सीजन सिलेंडर पहाड़ों पर आपकी सांसे हैं लोग एक्शन भी बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के वहां नहीं रह सकते हैं। ऑक्सीजन ना हो तो नाक से खून बहने लगता है शरीर नीला पड़ने लगता है–

शरीर का तापमान गिरता चला जाता है और हाइपोथर्मिया से मौत तक हो सकती है वहां होकर आपको एक-एक सांस किए हैं हमें पता चलती है माउंट एवरेस्ट की समिट में भले पूरी ना कर सकी लेकिन वहां से बहुत कुछ सीख कर लौटी हूं अगली बार पुनः प्रयास करूंगी तब तक तैयारियां जारी रहेगी।

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